Friday, July 15, 2016

खुशहाल परिवार और रिश्तों का रहस्य

अपने परिवार के साथ हर पल जश्न मनाएं, केवल त्योहारों का इंतजार न करें


आप केवल वही बाँट सकते है जो आपके पास हैं।

यदि आप अपने परिवार को प्रसन्न और समरस देखना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको अपने भीतर प्रसन्नता और शांति लानी होगीI

आर्ट ऑफ़ लिविंग के कार्यक्रमों में उपलब्ध की जाने वाली विशेष श्वास-प्रणाली की तकनीक और व्यावहारिक ज्ञान के माध्यम से इन खुशियों के स्रोत का रहस्य जानिये।


अपनी भावनात्मक महत्त्वाकांक्षाओं को त्यागिये, प्रेम को नहीं


जब हमें भावनाओं के तूफान का सामना करना पड़ता है, तब हम ऐसे शब्दों का प्रयोग कर देते हैं अथवा ऐसा कार्य कर देते हैं जिन से हमें बाद में खेद होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमें न तो स्कूल में और न ही घर पर क्रोध, दुख या किसी भी नकारात्मक भावना को संभालने की सीख दी जाती है।

आर्ट ऑफ़ लिविंग के “हैप्पीनेस प्रोग्राम” में सिखाई जाने वाली श्वास-प्रणाली का ज्ञान नकारात्मक भावनाओं को संयमित करने में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मन की हर लय के साथ श्वास की एक अनुरूप लय जुड़ी होती है। इसलिए यदि आप अपने मन को सामान्य रूप से स्थिर नहीं कर पाते हैं, तब श्वास में लय उत्पन्न कर मन को स्थिर किया जा सकता है।

जब हम उचित लय से लिए गये श्वासों के महत्त्व को समझ लेते हैं, तब हम अपने विचारों और अपनी भावनाओं को भी वश में कर सकते हैं और अपने क्रोध तथा नकारात्मक विचारों को अपनी इच्छा शक्ति से त्याग सकते हैं।

वास्तव में आर्ट ऑफ़ लिविंग के ‘हैप्पीनेस प्रोग्राम

’ में सिखायी जाने वाली सुदर्शन क्रिया के निरंतर अभ्यास से क्रोध और तनाव की आवृत्ति बहुत कम हो जाती है। इस से आप की परिस्थितियों को स्वीकार करने की क्षमता भी बढ़ जाती है। एवं बिना विचारे प्रतिक्रिया देने की बजाय आप में परिस्थितियों का सामना करने की तथा बुद्धि संगत व्यवहार करने की क्षमता बनती है।

स्वयं में प्रेम भाव को जीवन भर तरोताज़ा रखने के लिए स्वयं को उपरी सतह के आरंभिक आकर्षण से उपर उठने तथा बदलती भावनाओं को स्थिर करने की आवश्यकता है। चाहे भावनाओं में किसी भी तरह का उतार चढ़ाव आये, सुदर्शन क्रिया से आपको अपने प्रियजनों के साथ जीवन को आनंदपूर्वक व्यतीत करने की योग्यता भी प्राप्त होती है।


आपसी व्यवहार में तालमेल बैठाएं


“मेरे कहने का सचमुच यह तात्पर्य नहीं था, आप इस बात को समझते क्यों नहीं?"

तनाव सदा आपके विचारों, शब्दों और कार्यों के बीच एक निश्चित दरार बनाये रखता है।

जब आपका मन तनाव-मुक्त होता है तभी आप की धारणा और शब्दों में स्पष्टता आती है, और आपके व्यवहार में कोमलता आती हैI


अनाभिव्यक्ति को सहज रूप से अभिव्यक्त कीजिये


किसी भी बीज को ज़मीन की सतह पर छितरा कर फैला देने से या बहुत गहराई में दबा देने से वह बीज अंकुरित नहीं होताI उसे मिटटी में थोड़ा सा नीचे बोया जाता है तभी वह अंकुरित होता है और बढ़ कर एक पौधे का रूप लेता है। उसी प्रकार प्रेम की अभिव्यक्ति को भी मर्यादित करने की आवश्यकता हैI ध्यान-समाधि इस अभिव्यक्ति को सहज बनाती है।

द आर्ट ऑफ़ लिविंग के ‘हैप्पीनेस प्रोग्राम’ में सिखाई जाने वाली तकनीक आपको तनावमुक्त व सहज बने रह कर जीवन जीने की कला सिखाती है, जिससे आप अपने परिवार जनों के प्रति अधिक जागरूक एवं संवेदनशील होते हैँ, आसानी से स्वयं को अभिव्यक्त कर सकते हैं तथा दूसरे व्यक्ति भी, जो आप उन्हें कहना चाहते हैं, उस बात को ठीक प्रकार से समझ सकते हैं।

घर में शांति, प्रेम और प्रसन्नता की लहरों के आगमन के लिए अपने कदम उठाएं।

एक प्रसन्न मन आपको शांत रहने, बेहतर निर्णय लेने और जीवन की समग्र गुणवत्ता बनाये रखने में सहायता करता है। खुशी का हर एक पल आपके जीवन में कैसे पुनः सुधार ला सकता है, यह जानने के लिए कृपया नीचे दिए गए फॉर्म को भरें।|

ज्यादा स्वस्थ और खुश पाए गए हैं.

1 comment: